Showing posts with label dainik jagarn news uttarakhand. Show all posts
Showing posts with label dainik jagarn news uttarakhand. Show all posts

Sunday, March 23, 2008

जंगलों से गायब है बुरांश के फूलों की रंगत

चौखुटिया(अल्मोड़ा)। उत्तराखंड के जंगलों में बहुरंगी रंगत बिखेर देने वाले बुरांश व काफल के फूलों की अपनी एक अलग पहिचान है। बुरांश के फूल मार्च आखिरी से अप्रैल माह में खिलते है, लेकिन बारिश न होने से अबकी बार फीकापन नजर आ रहा है तथा बुराश के फूल गायब है। छुटपुट पेड़ों पर खिले भी है तो मुर्झाये हालत में। प्रकृति के बदलते स्वरूप से लोगों में निराशा है।

उत्तराखंड के विभिन्न जंगलों में बुरांश के वृक्ष करीब 5 हजार से 12 हजार फीट की ऊंचाई वाले भागों में पाये जाते है। इन दिनों इसके फूल प्रकृति की भव्यता व सुन्दरता में चार चांद लगा देते है तथा लोगों के मन को बरबस अपनी ओर लुभाते है। बुरांश के फूल चटक लाल रंग के होते है। कहीं-कहीं ऊंचे स्थानों पर सफेद फूल भी दिखाई देते है। बुरांश के फूल जहां मनोहारी दृश्य के दर्शन कराते है वहीं हमारे दैनिक जीवन में इनका विशेष महत्व भी है।

उत्तराखंड के तमाम जंगलों में पाये जाने वाले बुरांश के वृक्ष फरवरी के आखिर से पुष्पित होने लगते है तथा मार्च आखिर से अप्रैल माह में ये फूल जंगलों में बहुतायत खिले दिखाई देते है। गर्मी के प्रकोप के साथ ही ये फूल सूख कर जमीन में गिर जाते है। बुरांश के फूलों से गुणकारी जूस बनाया जाता है जो ह्दय रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है। साथ ही इसके अन्य कई उपयोग है। साथ ही पर्यटकों को भी बुरांश का फूल स्वत: ही अपने ओर खींचने की क्षमता रखता है।

वहीं इस बार जंगलों में बुरांश के फूलों की रंगत गायब है। कहीं-कहीं फूल खिले भी है तो बिल्कुल मुर्झाये है। कारण इस शीतकाल में बारिश का न होना व तेजाबी पाला गिरना है। इससे जंगलों में भी सूखे की हालत बनी है तथा बुरांश सहित अन्य वृक्षों की पत्तियां व कोपलें सूख गये है। जिससे जंगलों में फीकापन नजर आ रहा है। फूल व्यवसायी भी निराश है। क्योंकि लोग बुरांश के फूलों को जूस बनाने के लिये उपयोग करते है।

उफल्डा में पर्यावरण मित्र योजना शुरू

श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल)। उफल्डा में स्वच्छता अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए पर्यावरण मित्र योजना की शुरुआत की गई। क्षेत्र में जैविक और अजैविक कूड़े को रिक्शा पर इकट्ठा किया जा रहा है।

एक समारोह में आदर्श ग्राम पंचायत उफल्डा के प्रधान रमेश रावत ने योजना का शुभारंभ किया। क्षेत्र में पर्यावरण मित्र योजना को शुरू कराने में सहयोग के लिए एनएचपीसी, एसडीएम कीर्तिनगर व जन चेतना समिति का ग्राम पंचायत उफल्डा ने आभार व्यक्त किया। उफल्डा को आदर्श ग्राम पंचायत का दर्जा देने के लिए ग्राम प्रधान ने मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी का भी आभार व्यक्त किया और क्षेत्र के व्यापारियों व ग्रामीणों से पर्यावरण मित्र योजना को सफल बनाने को कहा।

Sunday, October 14, 2007

मुख्यमंत्री के भ्रमण से पूर्व अधिकारी जुटे होमवर्क मे

रुद्रप्रयाग। मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के 16 तारीख के जिला भ्रमण को लेकर प्रशासन के साथ ही सभी विभागीय अधिकारियों ने होमवर्क करना शुरू कर दिया है। जिले में मुख्यमंत्री के भ्रमण को लेकर भाजपा व आम जनता में काफी उत्साह है।

मुख्यमंत्री बनने के बाद बीसी खंडूड़ी ने सबसे पहले रुद्रप्रयाग जनपद से ही अपना भ्रमण कार्यक्रम शुरू किया था, लेकिन उस समय उनका कार्यक्रम जिला मुख्यालय होने के बजाय ऊखीमठ विकासखंड तक ही था। जिला मुख्यालय में पहली बार वे जनसभा को संबोधित करेगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की खबर से भाजपा के साथ ही आम जनता में काफी उत्साह है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री अपने भ्रमण कार्यक्रम के दौरान कोई बड़ी घोषणा कर सकते है। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी विजय कप्रवाण का कहना है कि मुख्यमंत्री क्षेत्र के विकास के लिए हमेशा प्रयासरत रहे है। ऐसे में मुख्यमंत्री के भ्रमण को लेकर आम जनता के साथ ही भाजपाइयों में भी भारी उत्साह है। वहीं पहली बार जनपद मुख्यालय में कोई मुख्यमंत्री आम जनसभा को संबोधित करेगा। मुख्यमंत्री के भ्रमण को लेकर प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी है। श्री खंडूड़ी के कार्यक्रम को लेकर अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक सभी अधिकारी होम वर्क पर जुट गए है। मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी की जनपद के केदारघाटी में स्थित सिद्धपीठ कालीमठ के प्रति गहरी आस्था है। अपने चुनावी समर की शुरुआत हो या फिर मुख्यमंत्री बनने के बाद जनपद भ्रमण की शुरुआत करनी हो मुख्यमंत्री काली मां के आशीर्वाद लेने यहां जरूर पहुंचते है।



http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_3822821.html

Wednesday, October 10, 2007

आय का अहम जरिया है सगंध पौधों की खेती

सितारगंज(ऊधमसिंहनगर)। ग्राम कल्याणपुर में सगंध पौधों की खेती को लेकर आयोजित प्रशिक्षण शिविर में कहा गया कि यह आय का महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है। बताया गया कि इन्हे अन्य फसलों के साथ भी उगाया जा सकता है।

सगन्ध पौध केन्द्र सेलाकुई (देहरादून) के तत्वावधान में दिये गये एक दिनी प्रशिक्षण में वैज्ञानिक आरके यादव ने बताया गया कि उत्तराखण्ड को हर्बल राज्य के रूप में विकसित करने के लिए तमाम योजनायें चलाई गई है। इसके तहत पहले चरण में विकास खण्ड क्षेत्र के ग्राम लौका, नकुलिया, सिसौना, धूसरी खेड़ा, कल्याणपुर आदि का चयन किया गया है। इनमें सगंध पौधों का कृषीकरण कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में ज्यादातर लेमनग्रास, मैन्था, पामारोजा, सिट्रोनेला, कैमोमिल की खेती की जा रही है। यादव ने बताया कि कल्याणपुर में आसवन संयंत्र भी स्थापित किया गया है। उन्होंने किसानों को विभिन्न प्रजाति के पौधों की खेती के बारे में बताया।

केन्द्र के वैज्ञानिक शेर सिंह ने पामारोज व मैन्था की खेती के बारे में जानकारी देते हुये कहा कि इससे किसानों को अतिरिक्त आय होगी। सगंध पौधों की खेती कर रहे काश्तकार रतन सिंह व कलस्टर के तकनीकी सदस्य शंकर लाल सागर ने बताया कि क्षेत्र में करीब चार सौ बीघा भूमि पर सगंध पौधों की खेती हो रही है। इससे किसानों को छह हजार रुपया प्रति बीघा की अतिरिक्त आय हो रही है। जिला पंचायत सदस्य बहादुर सिंह ने भी सगंध पौधों की खेती को लाभदायक बताया।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_3811256.html